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बिहार कांग्रेस में सियासी उथल-पुथल, छह विधायकों के दल बदलने की अटकलों से नेतृत्व सतर्क

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पटना। बिहार कांग्रेस इन दिनों गंभीर राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के सभी छह विधायक पार्टी नेतृत्व से असहज बताए जा रहे हैं और उनके सत्तारूढ़ जेडीयू के संपर्क में होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी को लेकर बिहार की राजनीति में बड़े सियासी उलटफेर की आशंका जताई जा रही है।
हालात की गंभीरता को भांपते हुए कांग्रेस नेतृत्व हरकत में आ गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर शुक्रवार शाम 4:30 बजे दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी स्वयं मौजूद रहेंगे। इस बैठक में बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, प्रभारी कृष्णा अलावरु के अलावा राज्य के सभी विधायक और सांसदों को शामिल होने का निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में विधायकों की नाराजगी, संगठनात्मक कमजोरी और आगे की रणनीति पर गहन मंथन होगा।
उधर, पटना स्थित इंदिरा भवन में भी कांग्रेस नेताओं की एक अलग बैठक प्रस्तावित है, जिसे पार्टी को टूट से बचाने की निर्णायक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व आखिरी वक्त तक विधायकों को साधने और भरोसे में लेने का प्रयास कर रहा है।
दरअसल, नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहे थे। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 202 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि विपक्षी महागठबंधन सिमट कर रह गया। कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ 6 सीटें ही जीत सकी। चुनावी नतीजों के बाद से ही संगठन में असंतोष के संकेत मिलने लगे थे।
पार्टी के भीतर बेचैनी का आलम यह रहा कि हाल के कई अहम कार्यक्रमों से कांग्रेस विधायक दूरी बनाते दिखे। सदाकत आश्रम में आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा समारोह हो या ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान की बैठक—विधायकों की गैरमौजूदगी ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी। जिन छह विधायकों के पार्टी छोड़ने की चर्चा है, उनमें मनीहारी, वाल्मीकिनगर, चनपटिया, अररिया, किशनगंज और फारबिसगंज से निर्वाचित विधायक शामिल बताए जा रहे हैं। यदि ये सभी कांग्रेस से अलग होते हैं, तो विधानसभा में पार्टी की मौजूदगी शून्य हो जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व समय रहते स्थिति संभालने में विफल रहा, तो बिहार की राजनीति में एक नया समीकरण उभर सकता है। फिलहाल, सबकी नजरें राहुल गांधी की दिल्ली बैठक और पटना में होने वाली चर्चा पर टिकी हैं, जहां से बिहार कांग्रेस के भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद की जा रही है।

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